सिराज भाई-हर लड़का/लड़की अपने अक़ीका के साथ रहन(गिर्वी) है- वज़ाहत के साथ.अक़ीका के अहेकाम- रसुल अल्लाह सल्लाअल्लाह अलैहि व सल्लम् का फ़रमान है.

आस्कड बायः डॉ.मोईन फ़ातेमा,औरंगाबाद,महाराष्ट्र-इंडिया.

आस्कड ऑनः04-10-2014,12-10 पीएम

आस्कड ईन-इसलाम मेरी ज़रुरत(लेडिज़) ग्रुप.

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जवाबः

हदीस इस तरह हैः

अरबीक…..

तर्जुमाः

सुमेराह बिन ज़ैनब… रज़ी अल्लाह ताआला अन्हा… कहेती हैं

रसुल अल्लाह सल्लाअल्लाह अलैह व सल्लम् ने फ़रमायाः

हर बच्चा अक़ीक़ा के बद्ल रहन रखा हूवा होता है. लेहाज़ा सातवें दिन जानवर ज़ुब्हा करो. इस का सर मुंढाव् और इस का अच्छा सा नाम रखो.सुन्न् अबु दाऊदः2838,सुन्न् निसाईः4220)

हदीस की तशरीहः

  1. हदीसके अल्फ़ाज़से वाज़्हे हैके हर बच्चे का अक़ीक़ा करना चाहिए-येह वाजीब है,सुन्नत् है और हर इस शख़्स पर जो साहेब इसतेतआत हो.
  2. अक़ीक़ा अगर लड़का- का होतो दो(2) बकरा और लड़की का होतो एक बकरा ज़ुब्हा करो.
  3. अक़ीक़ा सीर्फ छोटे जानवरमें ही होता है बड़े जानवरमें अक़ीक़ा नहीं होता. बड़े जानवरमें अक़ीक़ा करने के ताआलूक़से कोई भी सहीह हदीस नहीं मिलती.
  4. जानवर हम उम्र हों तो बहूत अच्छा है. जानवरमें उम्र की कोई क़ैद नहीं.
  5. अक़ीक़ा सातवे दिन करना बहेतर है. अगर ना होसके तो चौध्दवे दिन करें और अगर तब् भी ना होसके तो कभी ना कभी इसतेताअत मय्सर होजाए तब् ज़रुर करें.
  6. अक़ीक़ा को शादीके खाने में या वलीमामें मिलाना दरुस्त नहीं है कियोंके जीस तरह वलीमा करना एक मुस्तक़ील सुन्नत् है उसी तरह अक़ीक़ा का भी एक मुस्तक़ील सुन्नत् है.
  7. अक़ीक़ा का मक़्सद सीर्फ़ ख़ून बहाना,दाअवत देना या बड़ा फ़ंक्शन करना ज़रुरी नहीं.
  8. अक़ीक़ा का गोश्त ख़ुद भी खासकते हैं और दुसरोंको भी बांट सकते हैं.
  9. सातवे दिन ही बच्चे का अच्छे से अच्छै नाम रखसकते है
  10. सातवे दिन बच्चे का सर मुंढवाना चाहिए और जो बाल तुमने मुंढवाऐ इनके वज़न के बराबर चाँदी ख़ैरात करना चाहिए.
  11. सातवे दिन बच्चे का अच्छे से अच्छा नाम रखें.

नाम रखने के ताअलूक़से पाँच(5) शराएत हैं.

आ)अल्लाहके नामोंमें से नाम रखना.

नाम अल्लाहके नामोंमें हो तो नामसे पहेले अबद् लगाना जरुरी है.

जैसेःअब्दल्ला,अब्दुल रहेमान,अब्दुल सलाम, अब्दुल हादी वगैरह.

बी) नबी करीम सल्लाअल्लाह अलैह व सल्लमके नाम से नाम रखना-जैसेःमोहम्मद,अहमद, रफ़ीक़,सिराज-वगैरह

नबी सल्लाअल्लाह अलैह व सल्लम की कुन्यत-KUNIYAT नहीं रखना चाहिए-अल्लाहके नबी सल्लाअल्लाह अलैह व सल्लमने हमें इससे मना किया है.

नबी सल्लाअल्लाह अलैह व सल्लम की कुन्यत-KUNIYAT-अबु,अल् क़ासीम है.

सी) ऐसा नाम रखना जीसका मान्ना अच्छा हो-जैसेःईरफान, एहतेशाम,विक़ार वग़ैरह

ङी) ऐसा नाम नहीं रखना चाहिए जीसमें माअना निकल्ता हो-जैसेः ज़ोहा,कलबा,असना, शाक़ीक़,शाहीक़ वग़ैरह- ई) ऐसा नाम नहीं रखना चाहिए जो किसी ग़ैर-अल्लाह की तरफ़ मन्सूब हो-जैसेःजिलानी, ख्वाजा, अबी,मुनाफ़-वग़ैरह