असलाम अलैकुम सिराज भाईः मेरा सवाल है-मुसाफ़्हा-अपने दोनों हाथोंसे करना दुरुस्त है या फीर एक हाथसे.

आस्कङ बायः महोमद रमीज़ मानसुरी ऊर्फ़ शानो-इंदोरी,एमपी,

आस्कङ ऑनः03-10-2014,1:31 एएम,

आस्कङ ईनःफ़हेमुल्क़ुरआन-4-ग्रुप

जवाबः

मुसाफ़्हा एक हाथसे करना मस्नुन और मुस्तहब है. हालांके दोनों हाथसे मुसाफ़्हा करनेके इशारे भी अहादीसमें मिलते हैं, मगर रायेज-रिवाज,यहही हैके एक हाथसे मुसाफ़्हा करने वाली अहादीस बहूत ज़ियादा हैं और इन्में वज़ाहत व सराहत भी काफ़ी पाई जाती है.

आईए-सब्से पहेले हम दोनों हाथसे मुसाफ़्हा करने के तआलूक़से जान्नेकी कोशिश करते हैं. मैं यहां इमाम बुख़ारी रहमुहा अल्लाह का तरज़े इस्तेदलाल ब्यान करता हूँ.

इमाम बुख़ारी रहमुहा अल्लाह- ने पहेले एक बाब् बांधा-बाब्उल्मुसाफ़्हा…. याने मुसाफ़्हा का ब्यान- इस्में इमाम बुख़ारी रहमुहा अल्लाह-ने तीन हदीसें नक्कल की फीर इस्के बआद एक और बाबं बांधा-बाबउल्अख़्ज़ बिल्यदैन यानी दो हाथसे एक दुसरे के हाथोंको पकड़ने-का ब्यान- हालांके इमाम बुख़ारी रहमुहा अल्लाह-ने इस बाब् में जो हदीस् नक्क़ल किए है इस्को बाब् वल-मुसाफ़्हासे अलग रखा है. मदक इस दुसरे बाब् के साथही इसलाफ़ का एक अमल ब्यान किया और कहाः

(अरबीक….

यानी हामद बिन ज़ैद रहमुहा अल्लाह-ने ईब्ने मुबारक् से दोनों हाथोंसे मुसाफ़्हा किया, फीर उस्के बआद इमाम बुख़ारी रहमुहा अल्लाहने- यह हदीस नक़्ल किए.

(अरबीक…

इस हदीसमें ईब्ने मसूअद रज़ी अल्लाह तआला अन्हू- कहेते हैं- रसुल अल्लाह सल्लाअल्लाह  अलैह व सल्लम्-ने मुझे तश्हद्…तश्हूद-सिखाया- इस वक़्त मेरा हाथ अल्लाह सल्लाअल्लाह  अलैह व सल्लम्- की हथेलीयों के दरम्यान था.(सहीह बुख़ारीः6265)

इस हदीससे यह मालुम होता हैके किसी ज़रुरतके तहत-जैसेःक़ुरआन की तआलीम देना या किसी चीज़ की तैद… करना वग़ैरह के वक़्त दोनों हाथसे मुसाफ़्हा किया जासकता है.मगर आम् मआमोल यह होना चाहिए के सीर्फ एक हाथसे मुसाफ़्ह किया जाए.

इससे यह मालुम हूवाके दोनों हाथसे मुसाफ़्हा की तहाक़ीक़ रखने वालो-करने वालों को बुरा भला ना कहें- वह उनके नज़दीक राएज है.

अब् आईए- एक हाथसे मुसाफ़्हा को समझाने की कोशिश करते हैं.

लफ़्ज़ अल्मुसाफ़्हा बना है. सफ़ह-सफ़हासे- जीस का मआना है हथेली-अलमुसाफ़हा-बाब् मोफ़ा… आअलासे है-याअने एसा काम जीसमें दो तरफ़से शिरकत हो-

जब् दो अफ़राद की एक एक हथेली आपसमें मिलती है तो इस को मुसाफ़हा कहेते हैं.

अब् ज़ाहिरसी बात है मुसाफ़्हामें सिधे हाथ का दख़्ल ज़रुर है-अगर आप दोनों हाथों का इस्तेमआल करके मुसाफ़्हा करना चाहें तब् भी सिर्फ़ हथेली ही आपसमें मिलेगी-बाक़ी बचे हूए दोनों अफ़रादके बैन हाथ(लेफ़्ट हॅन्ङस) बे क़ायदा हैं कियोंके इनका इस्तेमाल हथेली मिलाने के लिए नहीं होरहा-इससे भी यही साबीत हूवाके मुसाफ़्हा हाथसे ही करना चाहिए.

हाथसे मुसाफ़्हाके कई दलाईल हैं.

जैसेः

अरबीक……

तर्जुमाः

अब्दुल्लाह बिन हशाम् रज़ी अल्लाह तआला अन्हूने कहा-हम अल्लाहके नबी सल्लाअल्लाह अलैह व सल्लम् के साथ थे ओर वह उमर बिन ख़िताब् रज़ी अल्लाह तआला अन्हू को (मुसाफ़्हा के दरम्यान)  हाथ पकड़े हूए थे.(सहीह बुख़ारी-6264)

इस हदीस् से बैअत…. भी यदें है(यानी हाथ और इस हदीस को इमाम बुख़ारी रह.ने मुसाफ़्हा के बाब् में नक़्ल किया है.इसी तरह् ज़बरदस्त और जामेआ हदीस् से मुसाफ़्हा करने के तआलुक़से इस तरह् आया है.

(अरबीक……….

तर्जुमाः

आप सल्लाअल्लाह अलैह व सल्लम् ने फ़रमायाः

जब् मुसलमान अपने मुसलमान भाईसे मुलाक़ात करता है और इसका हाथ पकड़ता है और मुसाफ़्हा करता है तो इन दोनों की उंगलीयों के दरम्यानसे गुन्हा इस तरह् जाते रहेते हैं जीस तरह् सख़्त गर्मीके दिनोंमें सुखे दरख़्तसे पत्ते झ़ड़ते हैं. अल्मोअज़्जमुल्कबीर तीबरान-6150,तारीख़ी वूसअत…वासीयत…पेज नम्बर-165.मुसनद् अहमदः4/289)