ईद्रीस भाई आप का सवालः सिराज भाई सवाल है हम पाँच वक़्त नमाज़ अदायगी करते हैं अब हमें कैसे मालुम होगाके हमारी नमाज़ क़ुबुल होरही है या नहीं…

जवाबः

बन्दे का काम ईबादत करना है और इसकी क़ुबुलीयत के लिए दुआ करना है अब अल्लाह चाहे तो इसे क़ुबुर करे या रद्द करे…

हमारी दुआ क़ुबुल हुई या नहीं हम कैसे मालुम करसकते.. इसी लिए अल्लाह तबारक तआला की ईबादत उम्मीद और ख़ौफ़से करना चाहिए यानी इस बात की उम्मीद होके अल्लाह मेरी नमाज़ क़ुबुल करे और साथ ही साथ इस बात का ख़ौफ़ भी होके अल्लाह मेरी नमाज़ रद्द भी करसकता है इसको ईबादत-ईमान कहेते हैं.