सिराज भाईः सवाल है किया-क़ुरआन और हदीस में उम्मत के इख़तलाफ़ का हल नहीं है. कियों के मुसलमानों के आपसी बढते हूए इख़तलाफ़ पर प्लीज़ रहनुमाई फ़रमाईए.

आस्कड बाय मोहम्मद जावेद,परभणी,महाराष्ट्र-इंडिया

आस्कड ऑन-14-10-2014, 11;02 पीएम

आस्कड ईनः फहेमुल्क़ुरआन-ग्रुप.

जवाबः

यक़ीन्न है मेरे भाई.

अगर क़ुरआन और हदीस में उम्मत के इख़तलाफ़ का हल नहीं तो और कहाँ.

क़ुरआन अल्लाह की तरफ़से ,अहादीस मुबारक भी अल्लाह की तरफ़से और इन दोनों को पहुँचाने वाले और अमल करदिखाने वाले हज़रत महोम्मद रसुल अल्लाह सल्लाअल्लाह अलैह व सल्लम-

अब् इनसे कामील परफ़ेक्ट कौन है.

क़ुरआन और हदीस को हम तक पँहुचाने वाले सहाबा ईकराम रज़ा अल्लाह ताआला अन्हूमा…..ताबअयीन,तबेअ ताबअयीन इनसे बहेत्तर अमानतदार कोई नहीं है.

हक़्क के मुक़ाबले में इख़तलाफ करना गुमराही है. और अल्लाह के नबी सल्लाअल्लाह व अलैह व सल्लम् ने हम लोगों के ताआलूक़से जो रीवायतें ली हैंके हरगिज़ गुमराह नहीं होंगे अगर हम दो च़िज़ों को मज़बुतीसे पकडलें.

जैसाके येह हदीस है.

(अरबीक….

तर्जुमाः

अल्लाहके नबी सल्लाअल्लाह अलैह व स्ल्लम् ने फ़रमायाः

अए-लोगों- में तुम्हारे दरम्यान दो चिज़ें छोडे जारहा हूँ तुम हरगिज़ हरगिज़ गुमराह ना होंगे अगर तुम इन दो चिज़ों को मद़बुतीसे पकडलो-थामलो(1)अल्लाह की किताब अल्कुरआन(2) अल्लाह के नबी सल्लाअल्लाह अलैह व सल्लम्-की सुन्नतें.

अलमौता…..अल्इमाम मलीकः1874,बरिवायत अबी मुस्सा-अबु हूरेराह रज़ी अल्लाह ताआला अन्हू-

इस हदीसमें सुन्नतके किया माअना हैं. इस ताआलूक़से आम् व ख़्वास में बेजा इख़्तलाफ़ है.

बाआज़ लोग कहेते हैं-सुन्नत यानी-नबी सल्लाअल्लाह अलैह व सल्लम् की सीर्फ वोहही बात जो आख़री हो फ़ायनल हो जीस पर आप सल्लाअल्लाह व अलैह व सल्लम् की मुदामत…. पाया जाता हो.येह बहूत बड़ी ग़ल्त फ़हमी है.

सुन्नत् की जमाअ-सुन्न् है.

अगर सुन्नत् का यही माअना होता तो क्याः

1)क्या इमाम तीर्मीज़ीमें सीर्फ ऐसी अहादीस नक़्ल की हैं.

2) क्या अबु दाऊद रहे.अल्लाहने अपनी किताब सुन्न् अबी दाऊदमें सीर्फ ऐसी ही अहादीस नक़्ल की हैं.

3) क्या इमाम निसाई रहे. अल्लाहने अपनी किताब सुन्न् निसाईमें सीर्फ ऐसी ही अहादीस नक़्ल की हैं.

4) क्या इमाम इब्न् माजा रहे. अल्लाहने अपनी किताब सुन्न् इब्न् माजा सीर्फ ऐसी ही अहादीस नक़्ल की हैं.

इन सब् का जवाब एक ही है और वोह है….. नाअहेलीयत……………

तो फीर इन बड़े बड़े अऐम्मा, महोदस्सीनने सुन्नत की किताब किस को कहा है.

यक़िन्न उन्होंने सुन्नत् से मराद हदीस ली है.

गोयाके क़ुरआन और सहीह हदीस येह दोनों चिज़ें मुसलमान को गुमराह होने से बचा सकती हैं.

अल्लाह तबारक व ताआलाने सुरतुल्मायदा की आयतमें इसी वक़्त येह बात ब्यान करदीके क़यामत तक् आने वाले इन्सानों-सुनलो तुम्हारा दीन कामील होचूका है.

अल्लाह तबारक व ताआला फ़रमाता हैः

अरबिक….

तर्जुमाः

आज मेंने तुम्हारा दीन मुक्कमल करदीया है और इस दीनके ज़रीएसे मैंने मेरी तमाम नाअमतें पुरी करदी हैं और तुम्हारे लिए बहैसीयत दीन इसलाम को पसन्द किया है.(सुरतुल्मायदाः3)

इन दलाईलके आजानेके बाअद भी कोई येह कहेता हैके क़ुरआन और हदीसमें सारे मसाईल का हल नहीं है तो फीर चाहे वोह अपनी गुमराहीमें पड़ा रहे.अपनी नफ़सानी ख़वाहेशसे मसाईल बलालें और इन पर अमल करता रहे कियोंके अल्लाह तबारक व ताआला फ़रमाता हैः

अरबीक…..

तर्जुमाः

बेशक्- तेरा रब्ब् वोही है जो इनके दरम्यान क़यामतके दीन फ़ैसला करेगा इन चिज़ोंमें जीसमें येह इख़तलाफ करते हैं.(सुरतुल्सजदा-सुन्न्-32,आयत नम्बर-32)

इख़तलाफ़ की जड़ः

बाआज़ आम् व ख़्वास येह..इसलाह.. करते हैंके वोह क़ुरआन और हदीसके इलावाह भी बहूतसी चिज़ोंको मानते हैं और इनका येह मानना ही हक्क़ की दलील है.

क़ुरआन और हदीसके इलावाह कोई दो चिज़ोंको मान्ना है तो कोई तीनको तो कोई तीनसे ज़ियादाको.

इस मसले को इस तरह ब्यान किया जासकता है.

इस दनियामे दो तरह्के चिज़ें है मान्ने-इत्तेबाह के एतेबारसे.

  1. ग़ैबी ऊमूर
  2. आम् फ़्हेम(कामन सेन्स(ऊमूर

ग़ैबी ऊमूर तो वोह है जीनका ज़िक्र क़ुरआन और हदीसमें आया है.अब् जो बातें क़ुरआन और हदीसमें हैं वोह हमारे समझमें आऐं या ना आऐं हमेंतो मान्ना ही है कियोंके वोह अल्लाह की तरफ़से हक्क़ बजानिब हैं.

दुसरी क़ीस्म की चिज़ें वोह हैं जो सहीह व हक्क़ होतो यक़िन्न इन्हे माना जाएगा और अगर ग़ल्त् साबीत होते हैं तो इनका रदद् किया जाएगा.

जैसेः फ़रज़ किजिए-आपके सामने एक ग्लासमें आधा(हाल्फ़) ग्लास पानी भरा हूवा है.

अगर कोई शख़्स आपको येह साबीत करना चाहता हैके येह आधा ग्लास है तो यक़िन्न आपका कामन सेन्स भी यही कहेता हैके येह आधा ग्लास ही है तो आप यक़िन्न इसको मान्ना ही चाहिए वोह सीबीत करनेमें नाकाम कियों ना होजाए कियोंके येही सच्च् है. अगर इस पर लोगों का इजमाअ होजाए तब् तो यक़िन्न इज्माअ हक्क़ पर होता है तो आपका मान्ना पहेले की बानिस्बत ज़ियादा होगा.

इसी तरहसे अगर कोई शख़्स आपको येह साबीत करना चाहेके वोह ग्लास पुरा तरह भरा हूवा है और वोह इस पर येह समझोता भी करता हैके इस पर लोगों का इजमाअ भी है तो आप क्या करेंगे. यक़िन्न आप इस बात को तस्लीम नहीं करेंगे कियोंके येह बात झूटी है और ग़ल्त है अगर फ़ीलफ़ौर इस बात पर सारे नौजवानों का इज्माअ होजाऐ तो आप किया करेंगे.

  1. सहीह चिज़के मुक़ाबलेमें सभी ग़ल्त चिज़ पर इज्माअ नहीं होता कियोंके सारे इन्सान बेवक़ूफ़ नहीं होते हैं.
  2. अगर बज़ाहेर ऐसा मालुम होता हैके इज्माअ है तो इसकी तहेक़ीक़ की जाऐ और यक़िन्न वोह इज्माअ ग़ल्त़ साबीत होगा.
  3. अगर फीर भी इज्माअ साबीत होजाऐ तो वोह दो सहाह चिज़ों में …तन्बीक़ पैदा की जाऐगी मगर अस्ल औरं सहीह चिज़को छोड़ा नहीं जाऐगा.

याद रहे येह काम कोई एक आदमी नहीं कर रहा है बल्के इस काम को ऊल्माअ ही करेंगे और यक़िन्न हर दौर में ऊल्माअ हक्क़ बजानिब हमारी रहेमुमाई करते आऐ हैं और करते रहेंगे. इन्शा अल्लाह-