आप का सवालः क़ुरआन को बाआवाज़े बुलन्द या आहिस्ता आहिस्ता या कभी ज़ोर से, कभी आहिस्ता पढ़ा जासकता है…

जवाबः

जी हाः

इस तरह पढ़ सकते हैं..

मक़्सद यह होके क़ुरआन सहीह पढ़ा जाए या क़ुरआन समझ में आजाए…